प्रकाशक की ओर से

हमारे पौराणिक ग्रन्थों में वर्णित दिव्य कथाएं हमारे राष्ट्र की गौरवशाली धरोहर हैं । ये न केवल सुन्दर हैं अपितु ये हमारी प्राचीन संस्कृति से हमारा परिचय भी करवाती हैं । सर्व सामान्य जन कैसे इनका आनन्द उठा सकें और कैसे अपनी संस्कृति की मूल चेतना के साथ सरलता के साथ जुड़ सकें, यह एक लंबे समय से मेरी विचारणा का विषय रहा है । एतदर्थ मन में एक ऐसी वेबसाइट तैयार करने की स्फुरणा उठती रही, जिसमें इन कहानियों को सुबोध भाषा में लिख कर इनका एक मनोरम संकलन तैयार किया जाये, जिसे पढ़ कर पाठक के मन में आनन्द के अलावा गौरव का बोध जगे ।
हंसवाहिनी माँ सरस्वती की असीम कृपा से वर्ष २०२५ की शारदीय नवरात्रि के मंगल अवसर पर हम अलकनन्दा नाम से एक ऐसी ही वेबसाइट का शुभारम्भ करने जा रहे हैं । इसमें पुराणों में वर्णित प्रसंगों को सरल और सुबोध कहानियों के माध्यम से सुधी पाठकों तथा बाल पाठकों तक पहुँचाना हमारा एक मात्र उद्देश्य है ।
आशा है पौराणिक-सांस्कृतिक कहानियों की यह सदानीरा सरिता अलकनन्दा परमात्मा का यशोगान करती हुई सतत प्रवाहित होती रहेगी ।
प्रिय पाठकगण अलकनन्दा को अपनी जिज्ञासा और रुचि के विषय बता सकते हैं । आपके सुन्दर परामर्श हमारे मार्गदर्शन होंगे ।
इति शुभम् ।
भवदीय

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